बल्क कूड़ा उत्पादकों पर नगर निगम का बड़ा एक्शन मोड में नगर आयुक्त
(संवाददाता एनकाउंटर समाचार)
देहरादून। स्वच्छ दून एवं सुन्दर दून की परिकल्पना को साकार करने के लिए सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों एवं आवासीय घरों में सूखे एवं गीले कूड़े का पृथक-पृथक एकत्रीकरण तथा शत-प्रतिशत डोर टू डोर कलेक्शन अत्यन्त ही आवश्यक है। इसे सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम लगातार प्रयासरत रहा है। पूर्व में भी नगर निगम द्वारा कई बार समाचार पत्रों के माध्यम से एवं नोटिस भेजकर बल्क वेस्ट जनरेटरों से अपील करी है कि वह अपने संस्थानों से निकलने वाला सूखा एवं गीला कूड़ा पृथक-पृथक एकत्रित करते हुये उसका निस्तारण सुनिश्चित करें।
कूड़े के पृथक-पृथक एकत्रीकरण की व्यवस्थाओं को जांचने के लिए नगर आयुक्त श्री मनुज गोयल स्वयं निरीक्षण पर निकले तथा हाथीबडकला स्थित सेंट्रियों माॅल पहुंचे तथा यहां पर उत्पन्न होने वाले कूड़े का निरीक्षण किया। सेंट्रियों माॅल पर गीले एवं सूखे कूड़े का पृथक-पृथक एकत्रीकरण नहीं किया जा रहा था तथा यहां कूड़ा एक साथ रखा पाया गया। यहां पर निर्धारित मानकों के अनुसार कम्पोस्टिंग यूनिट भी नहीं पाई गई। जिस पर नगर आयुक्त द्वारा माॅल के प्रबन्धकों को व्यवस्थायें सुधारने तथा नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी को सेट्रियों माॅल का चालान करने के साथ ही एक सप्ताह में पुनः कूड़े एकत्रीकरण एवं प्रबन्धन की व्यवस्थाओं को जांचने के निर्देश दिये।
नगर आयुक्त द्वारा होटल मैरियट में भी पहुँचकर सूखे एवं गीले कूड़े के पृथक-पृथक एकत्रीकरण एवं कूड़ा प्रबन्धन का जायजा लिया। यहां पर भी सूखे एवं गीले कूड़े को भी एक साथ एकत्रित किया गया था। होटल मैरियट में गीले कूड़े के प्रबन्धन हेतु कम्पोस्टिंग यूनिट बनी थी किन्तु प्रयोग में नहीं थी जिस पर होटल मैरियट का आर्थिक चालान करते हुये उसे व्यवस्थायें सुधारने के सख्त निर्देश दिये गये।
नगर आयुक्त द्वारा होटल हयात सेंट्रिक में पहुँचकर सूखे एवं गीले कूड़े के पृथक-पृथक एकत्रीकरण एवं कूड़ा प्रबन्धन का निरीक्षण किया गया। होटल हयात सेंट्रिक पर कूड़े प्रबन्धन पर गम्भीर अनियमितता बरतने की शिकायतें प्राप्त हो रही थी जो निरीक्षण के दौरान सही पाई गईं ।
ये होते हैं बल्क कूडा उत्पादक
केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा प्रबन्धन नियम, 2016 के तहत अपने परिसर में अधिक मात्रा में कूड़ा उत्पन्न करने वाले को बल्क कूड़ा उत्पादक कहा गया है। इसमें होटल, रेस्टोंरेंट, माॅल, 50 फ्लेट से अधिक की हाउसिंग सोसाइटी आदि आते हैं।

