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संपूर्ण विश्व की वैश्विक मजबूरी बन चुकी हिंदी को आत्मसात करे

संपूर्ण विश्व की वैश्विक मजबूरी बन चुकी हिंदी को आत्मसात करे

(संवाददाता एनकाउंटर समाचार)

अयोध्या। मातृभाषा हिन्दीअपनी विशिष्टता के बल पर ही आज विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा के रूप मे जानी पहचानी जाती है,अंतरराष्ट्रीय मंच पर मातृभाषा हिन्दी अपनी माधुर्य,सहजता,सरलता, लालित्य के बल पर अपनत्वमयी भाषा के रूप में स्थापित हो चुकी है,आज संपूर्ण विश्व की वैश्विक मजबूरी बन चुकी है कि वह हिंदी को आत्मसात करे। उक्त उदगार आज यहाँ श्रृंगार हाट अयोध्या स्थित वैदजी के मंदिर रघुनाथ भवन में हिन्दी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान द्वारा आहूत तैयारी बैठक की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार आशु कवि अशोक टाटम्बरी ने व्यक्त किया।

विदित हो आगामी 10जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर हिंदी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान(तुलसी स्मारक भवन)अयोध्या मे”अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में हिंदी” विषय परआयोजित संगोष्ठी व काव्योत्सव का आयोजन किया गया है,जिसके संबंध में समाजसेवी म.दिनेश दास जी महाराज ने कहा कि हिन्दी के राष्ट्र भाषा घोषित होने पर ही भारतीय संस्कृति व सभ्यता का संपूर्ण विकास होगा। बैठक का संचालन करते हुए हिन्दी संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ०सम्राट अशोक मौर्य ने समस्त साहित्य प्रेमियों काआभार व्यक्त करते हुए आगामी 10 जनवरी को आयोजित समारोह को सुचारू रूप से संपन्न कराने की अपील कीऔर कहा कि अयोध्या की धरती से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए आवाज बुलंद करना होगा।

समाज सेवी सपा की जिलाध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि हमें भारतीय संस्कृति व सभ्यता को संरक्षित एवं सुरक्षित करने के लिए हिंदी को पूर्ण आत्मसात करना ही होगा, संस्थान के संरक्षक मंडल सदस्य रामकेर सिंह ने कहा कि देश की संस्कृति को बचाने के लिए हिंदी को राष्ट्रभाषा शीघ्र घोषित किया जाए।समाजसेवी डॉoनिषातअख्तर ने कहा कि हिंदी के सशक्त हुए बिना भारत समृद्ध नहीं हो सकताlसमारोह को सुचारू से संपन्न कराने के लिए तमाम साहित्यकारों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई।

बैठक में प्रमुख रूप से संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विंध्यवासिनी शरण पांडिया, संपादक शिव कुमार मिश्र,जनमोर्चा के सूर्य नारायण सिंह,दीपचंद राही,डॉ०आशीष पांडेय,गुड़िया त्रिपाठी,सुमन दुबे,संजनी सिंह,प्रिया श्रीवास्तव,शैलेंद्र पांडेय “मासूम”,म.घनश्याम दास, अरुण सिंह,अजयश्रीवास्तव “अज्जू”,जल पुलिस प्रभारी रूबे प्रताप मौर्य,संतोष तिवारी, लक्ष्मी पांडेय,अधिवक्ता मृगेंद्र पाल सिंह,ज्योतिषआचार्य विजय कुमार पांडेय,पुष्पा चौहान,मुजम्मिल फिदा हुसैन, विभा पाटिल,विजय पाल वर्मा,वरिष्ठ पत्रकार नीलम सिंह,अरविंद कुमार तिवारी,अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ल,नौशादआलम,राम सजन वर्मा,प्रियाशुक्ला,ओमप्रकाश सोनी,जियालाल कन्नौजिया,सहित तमाम साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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